सरकारी जमीन पर बढ़ रहा कब्ज़ा, नगर निकायों ने भू-माफियाओं पर कसा शिकंजा

पटना. बिहार में सरकारी जमीन पर अवैध कब्ज़ा और फर्जी दस्तावेजों के ज़रिये खरीद-बिक्री का सिलसिला लगातार बढ़ रहा है। राज्य के कई जिलों से शिकायतें सामने आने के बाद नगर निकाय अब कड़े कदम उठा रहे हैं।

मुजफ्फरपुर नगर निगम ने हाल ही में बड़ा फैसला लेते हुए अपनी संपत्तियों पर रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज पर रोक लगा दी है। नगर आयुक्त विक्रम विरकर ने आदेश जारी कर कहा कि निगम की जमीन को निजी उपयोग या बिक्री की अनुमति किसी भी रूप में नहीं दी जा सकती।

शहर में कांटी और रामदयालुनगर जैसे इलाकों में कृषि विभाग और एनएचएआई की जमीन की अवैध खरीद-बिक्री के मामले सामने आए हैं। कई जगह तो रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज के बाद आलीशान मकानों का निर्माण भी हो चुका है। ऐसी शिकायतें केवल मुजफ्फरपुर तक सीमित नहीं हैं—पटना, दरभंगा, गया और भागलपुर जैसे शहरों में भी नगर निकायों को सरकारी जमीन पर कब्ज़े और बिक्री की शिकायतें मिल रही हैं।

निगमों की सख्ती

मुजफ्फरपुर में इस पर रोक लगाने के लिए नगर आयुक्त ने उप नगर आयुक्त, अभियंता और टाउन प्लानर की संयुक्त टीम बनाई है, जो संपत्तियों की पैमाइश कर रकबा, खाता और खेसरा का विवरण तैयार करेगी। इसी तरह पटना नगर निगम ने भी बीते दिनों अतिक्रमण हटाने की मुहिम तेज की थी।

नगर आयुक्त ने मुशहरी अंचलाधिकारी और जिला अवर निबंधक को पत्र लिखकर निगम की जमीनों पर ‘कंप्यूटराइज्ड लॉक’ लगाने का निर्देश दिया है, ताकि भविष्य में कोई फर्जी रजिस्ट्री न हो सके।

राज्यव्यापी समस्या

शहरी नियोजन से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार में शहरीकरण के बढ़ते दबाव के बीच सरकारी जमीन पर कब्ज़े के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। पार्क, स्कूल और प्रशासनिक भवनों के लिए सुरक्षित जमीन पर भी अवैध निर्माण देखे जा रहे हैं।

सरकार ने सभी जिलों के नगर निकायों को निर्देश दिया है कि वे अपनी संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करें और किसी भी संदिग्ध लेन-देन की सूचना तत्काल उच्चाधिकारियों को दें।

मुजफ्फरपुर नगर आयुक्त विक्रम विरकर ने कहा, “नगर निगम की संपत्तियां जनता की धरोहर हैं। इनका निजी उपयोग या बिक्री किसी भी रूप में वर्जित है। रजिस्ट्री कार्यालय और अंचल ऑफिस को सख्ती से जमीन की खरीद-बिक्री एवं दाखिल-खारिज रोकने को कहा गया है।”

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