रायपुर। छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण रोकने के लिए तैयार किए गए नए विधेयक पर आज राज्यपाल रमेन डेका ने हस्ताक्षर कर इसे कानूनी रूप दे दिया। अब राज्य में धर्म स्वातंत्र्य कानून पूरी तरह से लागू हो गया है और इसके तहत अवैध धर्मांतरण पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पीसीसी चीफ दीपक बैज की प्रतिक्रिया
धर्म स्वातंत्र्य विधेयक पर हस्ताक्षर के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि वे उम्मीद करते हैं कि इस कानून का उपयोग निर्दोष लोगों के खिलाफ नहीं किया जाएगा। उन्होंने इस अवसर पर यह भी मांग उठाई कि पिछले ढाई साल से राजभवन में पेंडिंग ओबीसी और अनुसूचित जाति आरक्षण से जुड़े विधेयकों पर भी हस्ताक्षर किए जाएं। बैज ने यह सवाल उठाया कि बीजेपी के लाए कानूनों पर हस्ताक्षर क्यों किए जाते हैं, जबकि अन्य मामलों में दोगुना मापदंड अपनाया जाता है।
विधायक पुरंदर मिश्रा का समर्थन
छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण रोकने वाले कानून के पारित होने पर बीजेपी विधायक पुरंदर मिश्रा ने इसे स्वागत योग्य बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और डिप्टी सीएम विजय शर्मा का आभार जताते हुए कहा कि यह कानून लोगों के भ्रम को दूर करेगा। मिश्रा ने स्पष्ट किया कि बीजेपी सभी धर्मों का सम्मान करती है, लेकिन किसी को प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराना स्वीकार्य नहीं होगा।
विधायक ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनका उद्देश्य भारत को विश्वगुरु बनने से रोकना है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में 500 चर्च बनाए गए और विदेशी ताकतें देश में धर्मांतरण को बढ़ावा देती रही हैं।
शिक्षा प्रणाली पर पीसीसी चीफ की आलोचना
PCC चीफ दीपक बैज ने राज्य सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार की नाकामियों के कारण नर्सरी स्तर पर बच्चों के एडमिशन का सिस्टम खत्म हो गया है, जिससे गरीब बच्चों की शिक्षा बाधित हो रही है। बैज ने जोर देकर कहा कि सभी बच्चों को नर्सरी से शिक्षा मिलनी चाहिए।
गांव चलो अभियान पर सवाल
बैज ने बीजेपी के ‘गांव चलो’ अभियान पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह अभियान कांग्रेस के पुराने अभियान की नकल है। बैज ने सवाल उठाया कि दो साल में बीजेपी ने युवाओं को पर्याप्त रोजगार और किसानों के धान की खरीदी सुनिश्चित की या नहीं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की आम जनता इन मुद्दों से परेशान है और आक्रोशित है।
छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026: प्रमुख प्रावधान
- अवैध धर्मांतरण पर 7 से 10 साल की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान।
- पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित होने पर सजा 10 से 20 साल की जेल और कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माना।
- सामूहिक धर्मांतरण पर सजा 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपये जुर्माना।
- अपराध संज्ञेय और अजमानतीय होंगे, सुनवाई विशेष न्यायालय में होगी।
- महिमामंडन, झूठ, बल, प्रलोभन, दबाव या कपटपूर्ण तरीके से धर्म परिवर्तन कराना अवैध होगा।
- स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट या सक्षम प्राधिकारी को पूर्व सूचना देनी होगी और 30 दिन में आपत्ति दर्ज कराने का प्रावधान रहेगा।
- प्रलोभन, प्रपीड़न, सामूहिक धर्मांतरण और डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण की स्पष्ट परिभाषा।
- पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा।
- अंतरधर्म विवाह में शादी कराने वाले पादरी या मौलवी को विवाह की तारीख से आठ दिन पहले सक्षम प्राधिकारी को घोषणापत्र प्रस्तुत करना होगा। प्राधिकारी तय करेगा कि विवाह धर्मांतरण के उद्देश्य से किया गया है या नहीं।



















