CBSE के नाम पर फर्जीवाड़ा…संसद से हाईकोर्ट तक गूंजा मामला

रायपुर। छत्तीसगढ़ में निजी स्कूलों द्वारा सीजी बोर्ड की मान्यता लेकर सीबीएसई पाठ्यक्रम चलाने के कथित गोरखधंधे का मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है। लोकसभा में इसे जोरदार तरीके से उठाया गया, वहीं हाईकोर्ट भी इस मुद्दे पर सख्त नजर आ रहा है।


लोकसभा में उठा बड़ा मुद्दा

कोरबा से सांसद ज्योत्सना महंत ने संसद में इस पूरे मामले को उठाते हुए आरोप लगाया कि कई निजी स्कूल फर्जी मान्यता के सहारे अभिभावकों से मोटी फीस वसूल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि:

  • सीजी बोर्ड की मान्यता के बावजूद सीबीएसई के नाम पर पढ़ाई कराई जा रही है
  • निजी प्रकाशकों की किताबें थोपकर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है
  • शिक्षा के अधिकार कानून की खुलेआम अनदेखी हो रही है

सांसद ने इस पूरे मामले की गंभीर जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।


आरटीई सीटों में कटौती पर भी सवाल

प्रदेश में शिक्षा के अधिकार कानून के तहत मिलने वाली सीटों में करीब तीन हजार की कमी को लेकर भी सवाल उठे हैं। इस मुद्दे पर पहले से ही याचिका लंबित है और अब यह बहस और तेज हो गई है।


हाईकोर्ट सख्त, मांगा जवाब

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए:

  • स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को नोटिस जारी किया
  • सभी निजी स्कूलों की विस्तृत जानकारी मांगी
  • शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया

डिवीजन बेंच ने यह भी संकेत दिए हैं कि यदि गड़बड़ी पाई गई तो बड़ी कार्रवाई संभव है।


क्या है पूरा विवाद

याचिका में यह आरोप लगाए गए हैं कि:

  • कई स्कूल बिना खुद के भवन के संचालित हो रहे हैं
  • किराए के कागजों के आधार पर मान्यता ली जा रही है
  • नियमों को दरकिनार कर शिक्षा व्यवस्था का व्यवसायीकरण किया जा रहा है

मान्यता के लिए जरूरी शर्तें

किसी भी स्कूल को मान्यता देने के लिए कुछ बुनियादी मानदंड तय हैं:

  • खुद का भवन और पर्याप्त कक्षाएं
  • बिजली, पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं
  • छात्रों के अनुपात में उचित व्यवस्था

इन नियमों की अनदेखी ही इस पूरे विवाद की जड़ मानी जा रही है।


डीपीआई का सख्त निर्देश

हाईकोर्ट के आदेश के बाद डीपीआई ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि:

  • 2 अप्रैल 2026 तक पूरी जानकारी जमा करें
  • सभी निजी स्कूलों का डाटा तैयार कर रिपोर्ट दें

आगे क्या?

अब सबकी नजर इस बात पर है कि:

  • स्कूल शिक्षा विभाग क्या रिपोर्ट पेश करता है
  • हाईकोर्ट आगे क्या कार्रवाई करता है
  • फर्जी मान्यता वाले स्कूलों पर क्या सख्ती होती है

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