NEW DELHI: भारत के चुनाव आयोग ने एक बार फिर सभी राजनीतिक दलों और मतदाताओं से मतदाता सूची को त्रुटि-मुक्त बनाने में सहयोग की अपील की है। आयोग ने साफ कहा है कि अगर मतदाता सूची में कोई भी गलती दिखाई दे, तो समय रहते इसकी जानकारी दी जाए, ताकि चुनाव से पहले ही उसे सुधारा जा सके।
यह अपील हाल के दिनों में कुछ राजनीतिक दलों द्वारा मतदाता सूची में गड़बड़ियों के आरोपों के जवाब में आई है। आयोग ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाना एक सामूहिक जिम्मेदारी है, जिसमें सभी हितधारकों का सहयोग अनिवार्य है।
पारदर्शिता की मजबूत प्रक्रिया
चुनाव आयोग ने अपनी प्रक्रिया को समझाते हुए कहा कि एसडीएम स्तर के इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के साथ मिलकर मतदाता सूची तैयार करते हैं। ड्राफ्ट सूची तैयार होने के बाद, इसकी डिजिटल और फिजिकल कॉपी सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को दी जाती है। साथ ही, इसे आयोग की वेबसाइट पर भी अपलोड किया जाता है।
इस प्रक्रिया के तहत, मतदाताओं और राजनीतिक दलों को आपत्ति या सुधार के लिए 30 दिनों का समय दिया जाता है। इस अवधि में मिली शिकायतों पर अधिकारी जांच कर सुधार करते हैं। फाइनल सूची प्रकाशित होने के बाद भी, यदि कोई गलती मिलती है, तो जिला मजिस्ट्रेट या मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास अपील करने का विकल्प खुला रहता है।
समय पर शिकायत क्यों जरूरी?
आयोग ने कहा कि मतदाता सूची में गड़बड़ी की शिकायतें तभी प्रभावी होंगी जब उन्हें सही समय पर, यानी ड्राफ्ट सूची के प्रकाशन के दौरान, उठाया जाए। समय पर शिकायत मिलने से चुनाव से पहले ही सभी गलतियों को ठीक करना संभव हो जाता है। आयोग का कहना है कि चुनाव से ठीक पहले आरोप लगाने से कोई लाभ नहीं होता और इससे पूरी प्रक्रिया पर अनावश्यक सवाल खड़े होते हैं।
आयोग ने सभी मतदाताओं से आग्रह किया है कि वे जागरूक नागरिक बनें और नियमित रूप से मतदाता सूची की जांच करें। गलत नाम, पता या अन्य त्रुटियों को तुरंत ERO या BLO को सूचित करें। यह सामूहिक प्रयास न केवल मतदाता सूची को त्रुटि-मुक्त बनाएगा, बल्कि भारत के लोकतंत्र को और मजबूत करेगा।