राजनांदगांव। जिलेभर के संकुल समन्वयकों का सामूहिक इस्तीफा शिक्षा जगत में चिंता का विषय बन गया है। गैर-शैक्षणिक कार्यों के बोझ से परेशान समन्वयकों ने सामूहिक रूप से पद छोड़ने का फैसला लिया है। उनका कहना है कि उनकी नियुक्ति शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और शिक्षकों को मार्गदर्शन देने के लिए हुई थी, लेकिन लगातार अन्य कार्यों में उलझाया जा रहा है।
दरअसल, शासन ने 26 सितंबर से 15 अक्टूबर तक गिरदावरी खसरा का भौतिक सत्यापन करने का आदेश दिया है। साथ ही, सप्ताह में चार दिन अध्यापन कार्य और दो दिन अकादमिक सशक्तिकरण के तहत स्कूलों का निरीक्षण करने की जिम्मेदारी भी दी गई है। इन आदेशों से नाराज़ होकर जिले के चार ब्लॉकों — डोंगरगांव, डोंगरगढ़, छुरिया और राजनांदगांव — के समन्वयकों ने पद से इस्तीफा सौंप दिया।
आंकड़ों के मुताबिक, डोंगरगांव ब्लॉक के 23, डोंगरगढ़ के 39, छुरिया के 43 और राजनांदगांव ब्लॉक के 44 समन्वयकों ने सामूहिक इस्तीफा प्रशासन को सौंपा है। उनका कहना है कि कई बार गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त करने की मांग की गई थी, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया।
समन्वयकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो शिक्षा गुणवत्ता अभियान के तहत चल रही निरीक्षण और मार्गदर्शन गतिविधियां प्रभावित होंगी। इससे स्कूलों की शैक्षिक व्यवस्था पर सीधा असर पड़ सकता है।



















