भिलाई YES बैंक घोटाला अब बड़े मोड़ पर पहुंच गया है। भिलाई की YES बैंक शाखा में सामने आए 165 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI को सौंप दी गई है। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की जांच प्रक्रिया पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि मामले में तथ्यों को छिपाने और लीपापोती की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने साफ किया कि निष्पक्ष और प्रभावी जांच के लिए CBI जांच ही सबसे उपयुक्त विकल्प है।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली बेंच ने दुर्ग एसपी को निर्देश दिया है कि मामले से जुड़े सभी दस्तावेज, एफआईआर और काउंटर एफआईआर समेत पूरी जानकारी CBI को सौंपी जाए। साथ ही CBI को नई एफआईआर दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 7 अप्रैल को होगी। भिलाई YES बैंक घोटाला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि इसमें भारी रकम के लेनदेन और कई स्तरों पर जांच में लापरवाही के आरोप लगे हैं।
मामले के मुताबिक, भिलाई निवासी अनिमेष सिंह के नाम पर YES बैंक की सुपेला शाखा में एक खाता खोला गया था। वर्ष 2020 तक इस खाते में 165 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेनदेन सामने आया। चौंकाने वाली बात यह है कि अनिमेष सिंह को एक साधारण कर्मचारी बताया गया है, जिसकी मासिक आय मात्र 12 हजार रुपये है। जांच में यह भी सामने आया कि इस खाते से 457 अन्य बैंक खातों में ट्रांजेक्शन हुआ, लेकिन इनमें से 285 खातों की जांच तक नहीं की गई।
भिलाई YES बैंक घोटाला मामले में खुर्सीपार थाने में पहले अनिमेष सिंह की ओर से एफआईआर दर्ज हुई, जबकि अगले ही दिन ठेकेदार हितेश चौबे ने काउंटर एफआईआर दर्ज कराई। आरोप है कि इसके बाद जांच की दिशा बदल गई और मामले को दबाने की कोशिश हुई। हाई कोर्ट ने YES बैंक की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि बैंक ने जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं किया तथा जरूरी जानकारी छिपाई। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने CBI जांच के आदेश दिए हैं, जिससे अब इस मामले में बड़े खुलासों की उम्मीद बढ़ गई है।



















