छत्तीसगढ़ “ के चर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। हाईकोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद पूर्व विधायक अमित जोगी ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर फैसले को चुनौती दी है। इस मामले की सुनवाई सोमवार को होने की संभावना जताई जा रही है।
निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए हाईकोर्ट का निर्णय
हाल ही में हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के पुराने फैसले को निरस्त करते हुए अमित जोगी को दोषी करार दिया था। अदालत ने उन्हें तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश भी दिया। इससे पहले निचली अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के आधार पर उन्हें बरी कर दिया था। हाईकोर्ट ने केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा प्रस्तुत विस्तृत दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर यह निर्णय सुनाया।
2003 की हत्या, साजिश की परतें
यह मामला 4 जून 2003 का है, जब राम अवतार जग्गी की रायपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जांच में सामने आया कि इस वारदात के पीछे सुनियोजित साजिश थी, जिसमें सुपारी देकर शूटरों को लगाया गया था।
जांच पर उठे सवाल, कई दोषी करार
मामले की जांच के दौरान कुछ पुलिस अधिकारियों पर भी साक्ष्य छिपाने और फर्जी गवाह पेश करने के आरोप लगे थे। वर्ष 2007 में विशेष अदालत ने 28 आरोपियों को दोषी ठहराया था, जबकि अमित जोगी को साक्ष्य के अभाव में राहत मिली थी। इसके बाद पीड़ित पक्ष ने उच्च न्यायालय का रुख किया।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश से फिर खुला मामला
नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने मामले की दोबारा सुनवाई के लिए हाईकोर्ट को निर्देश दिया था। उसी के आधार पर पुनर्विचार के बाद हाईकोर्ट ने नया फैसला सुनाया, जिसमें अमित जोगी को दोषी माना गया।
‘मुझे न्याय नहीं मिला’, जोगी का बयान
फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए अमित जोगी ने कहा कि उनके साथ अन्याय हुआ है। उन्होंने अदालत के निर्णय पर असहमति जताते हुए कहा कि उन्हें सर्वोच्च न्यायालय से न्याय मिलने की पूरी उम्मीद है। उनका कहना है कि सत्य अंततः सामने आएगा।
सियासत और न्याय के बीच चर्चित मामला
राम अवतार जग्गी हत्याकांड लंबे समय से छत्तीसगढ़ की राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया का संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी है, जहां इस मामले की अगली दिशा तय होगी।



















