बिलासपुर, 7 अप्रैल 2026 – छत्तीसगढ़ के 5,000 से अधिक सरकारी स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय नहीं होने की स्थिति को लेकर बिलासपुर हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने इसे शर्मनाक बताया और कहा कि पूर्व में दिए गए निर्देशों के बावजूद सुधार नहीं दिख रहा।
स्कूल शिक्षा विभाग को आदेश
डिवीजन बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को शपथ पत्र के साथ विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। जनहित याचिका की अगली सुनवाई 23 मार्च 2026 को होगी।
गंभीर स्थिति का खुलासा
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की बेंच ने जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान एक समाचार रिपोर्ट का हवाला दिया। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 5,000 से अधिक स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय नहीं हैं। वहीं, 8,000 से अधिक स्कूलों में शौचालयों की स्थिति अत्यंत खराब है।
स्वास्थ्य और शिक्षा पर प्रभाव
कोर्ट ने कहा कि शौचालयों की अनुपलब्धता और खराब स्थिति छात्राओं और शिक्षकों के लिए मुश्किलें बढ़ा रही है और मूत्र संक्रमण की घटनाओं में वृद्धि कर रही है। बिलासपुर जिले में 160 से अधिक स्कूलों में शौचालय से जुड़ी गंभीर समस्याएं हैं, जबकि 200 से अधिक स्कूलों में शौचालय पूरी तरह अनुपयोगी हैं।
प्रणालीगत विफलता
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि लड़कियों के लिए अलग और कार्यशील शौचालय की अनुपस्थिति स्कूल छोड़ने की दर बढ़ाने का कारण बन सकती है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के यू-डीआइएसई 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, राज्य के कुल 56,615 सरकारी स्कूलों में केवल 52,545 स्कूलों में लड़कियों के शौचालय क्रियाशील हैं। इस आंकड़े से स्पष्ट होता है कि लगभग 4,000 स्कूलों में समस्या बनी हुई है।
राज्य के सरकारी स्कूलों में कुल 19.54 लाख छात्राएं अध्ययनरत हैं, जिनके लिए शौचालय की यह कमी स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों के लिए गंभीर चुनौती प्रस्तुत करती है।



















