MP में फिर मधुमक्खियों का तांडव! गाडरवारा रेलवे स्टेशन पर यात्रियों पर किया हमला; भगदड़ में 10 से ज्यादा घायल

MP News: मध्य प्रदेश में मधुमक्खियों का आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा है. ताजा मामला नरसिंहपुर के गाडरवारा रेलवे स्टेशन का है. यहां रेलवे स्टेशन पर इंटरसिटी एक्सप्रेस का इंतजार कर रहे यात्रियों पर मधुमक्खियों के झुंड ने अचानक हमला कर दिया. अचानक हुए मधुमक्खियों के हमले से स्टेशन पर भगदड़ मच गई. जिसमें 10 से ज्यादा लोग घायल हो गए, जिन्हें सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया गया है. इनमें कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं.

पूरे प्लेटफॉर्म को खाली करवाना पड़ा

पूरा मामला गाडरवारा रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक का है. यहां शुक्रवार को यात्री इंटरसिटी एक्सप्रेस के लिए इंतजार कर रहे थे. तभी स्टेशन के पास पानी की टंकी में लगाए मधुमक्खियों के छत्तों से हजारों की संख्या में मधुमक्खियों ने यात्रियों पर हमला कर दिया. अचानक हुए मधुमक्खियों के हमले में यात्री घबरा गए. यात्रियों को जान बचाने के लिए अपना सामान तक छोड़कर भागना पड़ा. इस दौरान भगदड़ मच गई और कई यात्री इसमें घायल भी हो गए. लेकिन मधुमक्खियों का आतंक कम नहीं हुआ. इसके बाद रेलवे प्रशासन ने पूरे प्लेटफॉर्म को खाली करवाया. इसके कारण स्टेशन पर लोगों की आवाजाही भी प्रभावित हो गई.

पानी की टंकी में लगे हैं मधुमक्खियों के छत्ते

रेलवे स्टेशन के पास ही पानी की टंकी में मधुमक्खियों के छत्ते लगे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार रेलवे प्रशासन से इसकी शिकायत की जा चुकी है. लेकिन रेलवे लगातार इसकी अनदेखी कर रहा है. रेलवे प्रशासन की तरफ से कोई भी कदम नहीं उठाया गया है, जिसके कारण हमेशा मधुमक्खियों के हमले का डर बना रहता है.

मधुमक्खी के हमले में 9वीं के छात्र की मौत, 5 घायल

वहीं शुक्रवार को आगर मालवा जिले में मधुमक्खियों के हमले में 9वीं के एक छात्र की मौत हो गई, जबकि 5 अन्य बच्चे घायल हो गए हैं. पूरा मामला सोयतकला स्थित स्वामी विवेकानंद स्कूल का है. यहां स्कूली बच्चे परीक्षा देने आए थे, तभी मधुमक्खियों ने अचानक हमला कर दिया. जिसके बाद अफरा-तफरी मच गई.

बता दें मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में आए दिन मधुमक्खियों के हमले की खबरें सामने आती रहती हैं. 2 महीने पहले नीमत जिले में एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कंचन बाई की मौत हो गई थी. कंचन बाई ने बहादुरी और ममता दिखाते हुए 20 बच्चों को बचाने के लिए खुद के प्राणों की आहुति दे दी थी.

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