छत्तीसगढ़ को देश का अनुकरणीय आदर्श राज्यबनाने हेतु सर्व समाज मिलकर निभाएंगे दायित्व

समाचार, 3 फरवरी, 2026

तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजपेयी को साईं मसन्द के
लिखे पत्र पर लोकसभा में आया था इसका बिल

मध्य प्रदेश विधानसभा में बिल पास कराने साईं
मसन्द मिले थे कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से

      रायपुर। मसन्द सेवाश्रम रायपुर के तत्वावधान में पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी, जिन्हें छत्तीसगढ़ राज्य निर्माता भी कहा जाता है, की जन्म शताब्दी अंतर्गत "छत्तीसगढ़ को देश का अनुकरणीय आदर्श राज्य बनाने के उपाय" विषय पर सिंधु पैलेस शंकरनगर में रायपुर निवासी आदिवासी, सतनामी, अन्य पिछड़ा वर्ग, ब्राह्मण, सिंधी, पंजाबी, गुजराती, मारवाड़ी, मराठी, उड़िया, उत्तर भारतीय और दक्षिण भारतीय समाज के प्रतिनिधियों का एक सम्मेलन महात्मा गांधी पुण्यतिथि पर आयोजित किया गया। 
      सम्मेलन का उद्घाटन रायपुर उत्तर विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री पुरंदर मिश्रा ने किया और इसकी अध्यक्षता सम्मेलन के आयोजक  मसन्द सेवाश्रम के पीठाधीश साईं जलकुमार मसन्द साहब ने की। साईं  मसन्द साहब वर्तमान में "परम धर्म संसद 1008" के संगठन मंत्री हैं, जो ज्योतिर्मठ के पूज्य शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज द्वारा देश के चारों शंकराचार्यों के नेतृत्व में गठित 108 देशों का एक अंतरराष्ट्रीय हिंदू संगठन है। इस अवसर पर जाने-माने राज्य निर्माण आंदोलनकारी डॉ. उदयभान सिंह चौहान को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।          
      सम्मेलन में वरिष्ठ पत्रकार मधुकर द्विवेदी, रायपुर की राष्ट्रीय ख्यातिनाम समाजसेवी संस्था "बढ़ते कदम" के संयोजक इन्द्र कुमार डोडवाणी, पूज्य छत्तीसगढ़ सिंधी सेवा महापंचायत के अध्यक्ष, नगर निगम के संस्कृति विभाग प्रमुख, पार्षद अमरलाल गिदवाणी, उड़िया समाज के प्रधान किशोर महानन्द आदि सभी वक्ताओं ने अपने सम्बोधन में विषय की महत्ता प्रतिपादित करते हुए छत्तीसगढ़ को देश का अनुकरणीय आदर्श राज्य बनाने हेतु सर्व समाज द्वारा मिलकर दायित्व निभाने का संकल्प किया।
      सम्मेलन के आरंभ में, आयोजन पर प्रकाश डालते हुए साईं मसंद साहब ने बताया कि 25 दिसंबर की सुबह पता चला कि भारत रत्न से सम्मानित पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी, जिन्हें छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माता भी कहा जाता है, की जन्म शताब्दी शुरू हो गई है। श्री वाजपेयी जी से उनका परिचय  छप्पन साल पहले, 1969 में, महात्मा गांधी की जन्म शताब्दी वर्ष के दौरान हुआ था। समय के साथ, उनसे स्नेह और सम्मान का रिश्ता गहरा होता गया। श्री वाजपेयी न केवल राष्ट्रीय हित से जुड़े उनके हर पत्र पर तुरंत कार्रवाई करते थे, बल्कि उन्हें की गई कार्रवाई के बारे में भी बताते थे। उन्होंने फैसला किया कि वे अपनी पीठ, मसन्द सेवाश्रम के तत्वावधान में श्री वाजपेयी जी की जन्मशताब्दी अंतर्गत छत्तीसगढ़ के हित में कोई कारगर योजना शुरू कर उन्हें उचित श्रद्धांजलि देने की कोशिश करेंगे।
      उन्होंने बताया कि 1998 में छत्तीसगढ़ के बुद्धिजीवियों और स्वतंत्रता सेनानियों के संगठन "छत्तीसगढ़ संघर्ष मोर्चा" और कुछ अन्य संगठनों के नेतृत्व में चल रहे पृथक छत्तीसगढ़ राज्य आंदोलन के जोर पकड़ने के बाद, उन्होंने मई 1999 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी को एक पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ को अलग राज्य बनाने की आवश्यकता प्रतिपादित की। कुछ दिनों बाद, श्री रमेश बैस, जो उस समय उनके मंत्रिमंडल में राज्य मंत्री थे, ने रायपुर स्थित अपने आवास पर एक मुलाकात के दौरान उन्हें बताया कि प्रधानमंत्री वाजपेयी ने उन्हें और उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी को उनके पत्र की प्रतियां देकर उनसे पत्र के आधार पर एक प्रस्ताव तैयार करने और उसे लोकसभा में पारित करवाने के लिए कहा था।
      साईं मसंद साहब ने आगे बताया कि श्री रमेश बैस से यह जानकारी मिलने के बाद, 13 जून, 1999 को, उन्होंने अपने एक वरिष्ठ साथी, छत्तीसगढ़ राज्य के स्वप्नद्रष्टा कहे जाने वाले डॉ. खूबचंद बघेल के भतीजे, स्वतंत्रता सेनानी डॉ. दुर्गा सिंह सिरमौर, जो कभी वर्धा में राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी की निज सेवा में सेवारत रहे, के साथ दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भेंट की और नये राज्य निर्माण हेतु संवैधानिक आवश्यकता पूरी करवाने तत्सम्बंधी बिल विधानसभा में भी पारित करवाने का निवेदन किया। हमारे निवेदन को गंभीरता से स्वीकार करते हुए उन्होंने अगले दिन ही 14 जून को भोपाल से मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को दिल्ली बुलाया और कांग्रेस की मध्यप्रदेश राज्य प्रभारी महामंत्री महाराष्ट्र की सांसद डॉ. प्रभाराव से कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्री अर्जुन सिंह की अध्यक्षता में हमारी विशेष उपस्थिति में बैठक आयोजित करवाकर इस संदर्भ में विधिवत प्रस्ताव पारित करवाया।
      सम्मेलन की सफलता में छत्तीसगढ़ क्षत्रिय कल्याण संगठन के अध्यक्ष सत्येंद्र कुमार गौतम, अ. भा. भोजपुरी साहित्य सम्मेलन छत्तीसगढ़ इकाई के प्रदेश उपाध्यक्ष हरिशंकर मिश्रा, सर्व ब्राह्मण समाज के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश शुक्ला, चेटीचंड महोत्सव समिति, पुज्य सिंधी पंचायत लाखेनगर के अध्यक्ष मनूमल पृथवाणी, पूज्य छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत महिला शाखा की प्रदेश अध्यक्ष दिशा रामाणी, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष जुही दरयाणी, पूज्य छत्तीसगढ़ सिंधी सेवा महापंचायत के महामंत्री, पूर्व पार्षद जितेंद्र बड़वानी, श्रीराम मंडली के संस्थापक, पूर्व पार्षद प्रेम बिरनाणी, उपाध्यक्ष लोकचंद भावनाणी, अमर शहीद हेमू कालाणी समिति के संयोजक अनेश बजाज, मसन्द सेवाश्रम के प्रवक्ता मयंक मसन्द, समाजसेवी अनूप मसन्द, समाजसेवी मोनू आहूजा, समाजसेवी आनन्द आईलवार, पूज्य जवाहर नगर सिंधी पंचायत के अध्यक्ष अर्जुनदास ओचवाणी, पूज्य शंकरनगर शांतिनगर सिंधी पंचायत के वरिष्ठ सलाहकार नामदेव मोरयाणी, पूर्व अध्यक्ष प्रहलाद शादीजा, टिकरापारा सिंधी पंचायत के संरक्षक झामनदास बजाज, पुराना राजेंद्रनगर सिंधी पंचायत के अध्यक्ष डॉ. गजवाणी, पूज्य सिंधी पंचायत देवेन्द्र नगर के उपाध्यक्ष राजकुमार सोनी, समाजसेवी संस्था "सेवा पथ" के संस्थापक पहलाज खेमाणी, सुदर्शन मैरिज ब्यूरो के महासचिव अजय बजाज एवं "एक पहल और" संस्था की अनेक बहनों का बड़ा योगदान रहा।

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✍️ मयंक मसंद, प्रवक्ता, मसंद सेवाश्रम रायपुर

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