हरि शेवा आश्रम में गुरूओं के वार्षिक वर्सी उत्सव के तहत विविध सेवा सुमिरन प्रकल्प
चतुर्थ तिथ पर बाबा गंगाराम साहब जी का 29वां वार्षिक वर्सी उत्सव कल
सेवा-सुमिरन ही जीव का आधार – महामण्डलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन
तन मन तेरा, धन भी तेरा, तू ठाकुर स्वामी मेरा’’ भजन प्रस्तुत करते हुए महामण्डलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन ने समझाया कि ईश्वर कभी भी भौतिक पदार्थ नहीं चाहते है, उनके दर पर शुद्ध अन्तःकरण से केवल श्रद्धा एवं भक्ति को साथ में लेकर आना चाहिए। यदि हम अपना मन ईश्वर को अर्पित करते है तो हमें कभी इस संसार के आगे झुकना नहीं पड़ता है। हरि शेवा उदासीन आश्रम में चल रहे चार दिवसीय वर्सी उत्सव के तीसरे दिन उन्होंने कहा कि सेवा सुमिरन ही जीव का आधार है।
प्रातःकालीन सत्र में नित्य की भांति वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन यज्ञ सम्पन्न हुए। अन्न क्षेत्र सेवा हुई। तत्पश्चात् संतो-महात्माओं के सत्संग-प्रवचन हुए, जिसमें श्रीमहंत स्वरूपदास उदासीन अजमेर ने भजन आशीष का हथड़ा मुहिंजा साईं मुतें रखजो प्रस्तुत किया। इसके अतिरिक्त श्रीमहंत आत्मदास उज्जैन, श्रीमहंत हनुमानराम उदासीन पुष्कर, स्वामी अमरलाल राजकोट, स्वामी अर्जुनदास, स्वामी ईसरदास अजमेर, स्वामी मोहनदास चंदन इन्दौर एवं उदासीन निर्वाण मण्डल के संत महात्माओं ने संगत को दर्शन लाभ प्रदान किया।
आश्रम के बालक सिद्धार्थ एवं इन्द्रदेव उदासीन ने संत कृष्णदास की कथा सुनाते हुए बताया कि कलिकाल में संतो की शरण में जाने से ही प्रभु की प्राप्ति हो सकती है और प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में किसी भी प्रकार संतो की सेवा का अवसर निकाल ही लेना चाहिए। सांयकाल में नितनेम, हनुमान चालीसा पाठ, श्री मात्रा साहब पाठ, सत्संग हुए। रात्रिकालीन सत्र में भोपाल की राम श्याम एवं पार्टी ने संतो-महात्माओं के सान्निध्य में धार्मिक एवं सनातनी भजनो से समां बांधते हुए श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। वर्सी उत्सव में देश-विदेश से आश्रम के श्रद्धालुओं का आना जारी है। सम्पूर्ण आश्रम परिसर में रंग-बिरंगी आकर्षक विद्युत सज्जा की गई है।
उत्सव के चतुर्थ एवं अन्तिम दिन 29 जून रविवार को बाबा गंगाराम जी की चतुर्थ तिथ के अवसर पर बाबाजी का 29वां वार्षिक वर्सी उत्सव मनाया जायेगा, जिसके तहत श्री रामायण पाठ, श्री श्रीचंद्र सिद्धान्त सागर अखण्ड पाठ का भोग पड़ेगा। संतो-महापुरूषों का भण्डारा एवं आम भण्डारा होगा। नित्य हवन यज्ञ, मण्डल पूजन, अन्न क्षेत्र सेवा, सत्संग प्रवचन प्रातः एवं सांय में होगें। सतगुरूओं की समाधि साहब, धूणा साहब, आसण साहब, दरबार साहब पर विशेष पूजन अर्चन किया जायेगा। तत्पश्चात् परम्परा अनुसार श्रद्धालुओं एवं अनुयायियों की मंगल कामना सहित विश्व शांति की प्रार्थना करते हुए उत्सव विश्राम होगा।