दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुशासन तिहार के अंतर्गत शनिवार को दंतेवाड़ा जिले के घोर नक्सल प्रभावित मुलेर गांव का दौरा किया। यह वही गांव है जो कभी नक्सलियों की गतिविधियों के लिए बदनाम था, लेकिन अब बदलाव और विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है।
इमली के पेड़ के नीचे लगी चौपाल, खाट पर बैठकर सुनी समस्याएं
मुख्यमंत्री ने गांव के बीचोंबीच एक इमली के पेड़ के नीचे चौपाल लगाई। ग्रामीणों की समस्याएं सुनते हुए वह खाट पर बैठकर सहज संवाद करते नज़र आए। उन्होंने जो भी मुद्दे ग्रामीणों ने उठाए, उस पर तुरंत अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए।
परंपरागत स्वागत से अभिभूत हुए मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री के गांव आगमन पर महुआ और आम पत्तों से बने हार और गौर मुकुट पहनाकर पारंपरिक स्वागत किया गया। ग्रामीणों के इस आत्मीय स्वागत से मुख्यमंत्री भावुक हो गए और उन्होंने कहा कि “आपके बीच आकर मुझे सच्चे भारत के दर्शन होते हैं।”
बच्चों से संवाद और चॉकलेट भेंट, राशन दुकान का निरीक्षण भी
मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण करते हुए बच्चों से बातचीत की और उन्हें चॉकलेट दी। उन्होंने बच्चों की शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य को लेकर अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली।
इसके अलावा, गांव की राशन दुकान और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की व्यवस्था का भी जायज़ा लिया। मुख्यमंत्री ने राशन वितरण की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उच्च अधिकारियों और कड़ी सुरक्षा के बीच हुआ दौरा
इस अवसर पर मुख्य सचिव अमिताभ जैन, डीजी अरुण देव गौतम और प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह भी मुख्यमंत्री के साथ मौजूद थे। नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण गांव में भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए थे, ताकि मुख्यमंत्री का दौरा पूरी तरह सुरक्षित रहे।
नया संदेश: विकास और विश्वास की ओर बढ़ते कदम
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का यह दौरा न सिर्फ प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह नक्सल प्रभावित इलाकों में भरोसे और विकास का नया संदेश भी देता है। एक समय नक्सल हिंसा का गढ़ रहे मुलेर जैसे गांवों में अब गवर्नेंस की चौपालें लग रही हैं, जो छत्तीसगढ़ के बदलते स्वरूप की तस्वीर बयां कर रही हैं।



















