रायपुर, छत्तीसगढ़: बहुचर्चित डीएमएफ घोटाले की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने इस मामले में तेजी दिखाते हुए कोरबा जनपद पंचायत के चार पूर्व मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को छह दिन की रिमांड पर लिया है। अदालत ने इन अधिकारियों को 19 मई 2025 तक ईओडब्ल्यू की हिरासत में भेजा है।
इन अधिकारियों को लिया गया रिमांड पर:
- भरोसाराम ठाकुर (तत्कालीन डीएमएफटी नोडल अधिकारी)
- भूनेश्वर सिंह राज (पूर्व जनपद सीईओ)
- राधेश्याम मिर्झा (पूर्व जनपद सीईओ)
- वीरेंद्र कुमार राठौर (पूर्व जनपद सीईओ)
ईओडब्ल्यू ने मंगलवार को इन्हें अदालत में पेश किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अभियोजन पक्ष ने अदालत से अतिरिक्त रिमांड की मांग की, जिसे विशेष न्यायाधीश ने स्वीकार कर लिया।
महत्वपूर्ण दस्तावेज़ी सबूतों की तलाश
ईओडब्ल्यू के विशेष लोक अभियोजक ने न्यायालय को अवगत कराया कि प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों से महत्वपूर्ण बयान और सुराग प्राप्त हुए हैं। इन तथ्यों के आधार पर दस्तावेजी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। जांच एजेंसी अब रिमांड अवधि में इन चारों से गहराई से पूछताछ कर डीएमएफ फंड में हुए 90 करोड़ रुपये से अधिक के गड़बड़झाले की कड़ियाँ जोड़ना चाहती है।
रानू साहू और अन्य की रिमांड 27 मई तक बढ़ी
घोटाले में फंसे प्रमुख आरोपी — निलंबित आईएएस रानू साहू, पूर्व सीएमओ सौम्या चौरसिया, कारोबारी सूर्यकांत तिवारी, मनोज द्विवेदी और एक महिला अधिकारी को अब भी जेल से राहत नहीं मिली है। इनकी न्यायिक रिमांड को 14 दिन के लिए और बढ़ाया गया है।
मंगलवार को विशेष न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि मामले की जांच अब भी जारी है, लिहाज़ा न्यायिक रिमांड की आवश्यकता है। अदालत ने इस तर्क को मानते हुए 27 मई 2025 को अगली पेशी की तारीख तय की है।
ईडी की जांच भी जारी
यह उल्लेखनीय है कि डीएमएफ घोटाले की जांच केवल ईओडब्ल्यू ही नहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी कर रही है। अब तक सामने आए तथ्यों के अनुसार यह घोटाला 90 करोड़ 48 लाख रुपये से अधिक का हो सकता है। ऐसे में दोनों एजेंसियां मिलकर राज्य के सबसे बड़े घोटालों में से एक की परतें खोलने में जुटी हुई हैं।



















