CG News: राजिम हिंसा और आगजनी मामले में आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत, जमानत पर सुनवाई टली

हाई कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था आरोपी, अब बाद में होगी सुनवाई

बिलासपुर। गरियाबंद जिले के राजिम थाना क्षेत्र में हुई बहुचर्चित हिंसा और आगजनी की घटना से जुड़े एक आरोपी को फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद आरोपी ने विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन मामले की सुनवाई फिलहाल टाल दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने आगे की तारीख पर सुनवाई करने का दिया निर्देश

आरोपी पियूष साहू उर्फ पिंटू की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस संजीव सचदेवा की खंडपीठ में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अतिरिक्त समय देने का आग्रह किया गया। इस पर अदालत ने मामले को आंशिक अवकाशकालीन कार्य अवधि समाप्त होने के बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया। फिलहाल आरोपी को किसी प्रकार की अंतरिम राहत नहीं मिली है।

फरवरी 2026 की हिंसा से जुड़ा है मामला

यह मामला फरवरी 2026 में राजिम थाना क्षेत्र में हुई हिंसा और आगजनी की घटना से संबंधित है। अभियोजन के अनुसार एक युवक द्वारा कथित रूप से शिवलिंग तोड़े जाने की घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया था। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग शिकायतकर्ता कासमुद्दीन कुरैशी उर्फ राजू खान और उसके परिवार के घर पहुंच गए।

आरोप है कि भीड़ ने घरों में तोड़फोड़ की, मारपीट की और कई मकानों तथा वाहनों में आग लगा दी। प्राथमिकी के अनुसार हमलावरों ने लोहे की रॉड, डंडों और चाकू जैसे हथियारों का इस्तेमाल किया। घटना में शिकायतकर्ता, उसके परिजन और आसपास के कई लोग घायल हुए। हालात नियंत्रित करने पहुंची पुलिस टीम पर भी हमला किया गया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।

हाई कोर्ट ने गंभीर आरोपों का हवाला देकर खारिज की थी जमानत

इससे पहले छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने आरोपी की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने माना था कि आरोपियों पर गैरकानूनी जमावड़े का हिस्सा बनने, शिकायतकर्ता और उसके परिवार पर हमला करने, पुलिसकर्मियों को चोट पहुंचाने, आगजनी करने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप हैं।

अदालत ने कहा था कि मामले की गंभीरता और घटना के स्वरूप को देखते हुए नियमित जमानत देना उचित नहीं होगा। साथ ही ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया गया था कि वह मामले की सुनवाई यथाशीघ्र पूरी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाए।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *