छत्तीसगढ़ में फर्जी बैगा जाति प्रमाण पत्र का बड़ा खेल…असली आदिवासियों का हक छीन रहे नकली उम्मीदवार, एमबीबीएस सीट से सरकारी नौकरी तक पर सवाल

 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा के नाम पर कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनाकर सरकारी नौकरियां और आरक्षण का लाभ लेने का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि संगठित तरीके से तैयार किए गए फर्जी दस्तावेजों के जरिए कई लोग अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित अवसरों पर कब्जा कर रहे हैं। इससे वास्तविक बैगा समुदाय के युवाओं को शिक्षा और रोजगार में मिलने वाला अधिकार प्रभावित हो रहा है।

शिकायतों के बावजूद अब तक व्यापक जांच और ठोस कार्रवाई नहीं होने से इस पूरे मामले पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

कोटा और मस्तूरी ब्लॉक में सबसे ज्यादा शिकायतें

मिली शिकायतों के अनुसार बिलासपुर जिले के कोटा और मस्तूरी विकासखंड में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के जरिए सरकारी लाभ लेने के कई मामले सामने आए हैं। आरोप है कि गोंड़, भूमिया और उरांव सहित अन्य समुदायों के कुछ लोगों ने कथित तौर पर बैगा जनजाति के नाम पर प्रमाण पत्र बनवाकर आरक्षण का लाभ लिया और सरकारी सेवाओं में नियुक्तियां हासिल कर लीं। बताया जा रहा है कि ऐसे कई लोग शिक्षाकर्मी के रूप में कार्यरत हैं।

एमबीबीएस प्रवेश को लेकर भी उठे सवाल

विवाद उस समय और गहरा गया जब एक छात्र के एमबीबीएस प्रवेश को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए। शिकायत में दावा किया गया है कि छात्र ने वर्ष 2023 में बैगा जनजाति का कथित फर्जी प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर अनुसूचित जनजाति कोटे से रायपुर के पंडित जवाहर लाल नेहरू मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में प्रवेश प्राप्त किया।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि संबंधित छात्र का परिवार मूल रूप से ओबीसी वर्ग से जुड़ा है, जबकि प्रवेश के समय अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया।

दस्तावेजों में अलग-अलग जाति का दावा

मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि अलग-अलग सरकारी अभिलेखों में परिवार की जाति संबंधी जानकारी अलग-अलग दर्ज है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि भू राजस्व रिकॉर्ड में परिवार की जाति धीवर दर्ज है, जबकि अन्य दस्तावेजों में बैगा दर्शाया गया है। इसी आधार पर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।

पोड़ी गांव से जुड़े बताए जा रहे हैं कई मामले

शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि मस्तूरी विकासखंड के ग्राम पोड़ी से बड़ी संख्या में बैगा जाति प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं, जबकि वर्ष 2015-16 के सर्वे और उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार वहां बैगा समुदाय का निवास नहीं है। आरोप है कि इसी क्षेत्र से जुड़े कई लोगों ने विशेष पिछड़ी जनजाति का लाभ प्राप्त किया।

इन इलाकों में जांच की उठी मांग

सर्व आदिवासी समाज ने कोटा ब्लॉक के बेलगहना क्षेत्र सहित कई ग्राम पंचायतों में विशेष जांच की मांग की है। संगठन का कहना है कि यदि सभी संदिग्ध प्रमाण पत्रों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े का खुलासा हो सकता है।

कमिश्नर ने जांच का दिया भरोसा

बिलासपुर संभाग के कमिश्नर सुनील कुमार जैन ने कहा है कि कुछ विकासखंडों से फर्जी बैगा जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी प्राप्त करने संबंधी शिकायतें मिली हैं। संबंधित विभागों को जांच के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

जांच के बाद ही होगी अंतिम स्थिति स्पष्ट

फिलहाल पूरे मामले में कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। प्रशासन का कहना है कि सभी शिकायतों की विधिवत जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

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