बागपत में दर्द और खुशी का एक साथ टकराया पल, परिवार पर टूटा भावनाओं का पहाड़

उत्तर प्रदेश: बागपत जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया है। एक ही परिवार में एक तरफ बड़े बेटे की पुलिस वर्दी पहनने की खुशी थी, तो दूसरी तरफ छोटे बेटे की अंतिम विदाई का दर्द। इस अनोखे संयोग ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया।

एक ही घर में दो विपरीत भावनाएं, खुशियों के बीच गम का साया

बागपत के छपरौली क्षेत्र के लूम्ब गांव में रहने वाले मोहित चौहान के घर उस समय उत्सव का माहौल था, जब वह यूपी पुलिस में शामिल होने की तैयारी कर रहे थे। परिवार के लिए यह गर्व का क्षण था, लेकिन इसी बीच एक ऐसी खबर आई जिसने पूरे माहौल को मातम में बदल दिया।

परिवार को जहां एक बेटे की सफलता की खुशी मिल रही थी, वहीं दूसरे बेटे की असामयिक मौत की सूचना ने सबकुछ छीन लिया।

अरुणाचल प्रदेश में ड्यूटी के दौरान हुआ दर्दनाक हादसा

जानकारी के अनुसार, मोहित चौहान के छोटे भाई सोहित चौहान अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना में तैनात थे। ड्यूटी के दौरान एक पेड़ गिरने से वह गंभीर रूप से घायल हो गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

यह खबर जैसे ही परिवार तक पहुंची, घर में कोहराम मच गया। जिस समय बड़े भाई मोहित चौहान पुलिस की वर्दी पहन रहे थे, उसी समय छोटे भाई सोहित की अंतिम यात्रा की तैयारी हो रही थी।

अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब, सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

सोहित चौहान के अंतिम संस्कार में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। हर किसी की आंखें नम थीं और पूरा माहौल गमगीन था।

भारतीय सेना की ओर से उन्हें पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। गार्ड ऑफ ऑनर और सलामी देकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर स्थानीय लोग, प्रशासनिक अधिकारी और कई जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

शहीद का दर्जा देने की उठी मांग, परिवार की आंखों में इंसाफ की उम्मीद

इस दर्दनाक घटना के बाद क्षेत्र में शोक के साथ-साथ एक मांग भी जोर पकड़ रही है। स्थानीय लोगों और परिजनों ने सरकार से मांग की है कि सोहित चौहान को शहीद का दर्जा दिया जाए।

परिवार का कहना है कि देश सेवा के दौरान जान गंवाने वाले सोहित का सम्मान होना चाहिए, ताकि उनकी शहादत को सही पहचान मिल सके।

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