बड़ा प्रशासनिक एक्शन : भाषा के आधार पर बच्चे को प्रवेश से रोकने पर स्कूल पर 1 लाख का जुर्माना, संचालन भी तत्काल स्थगित

अंबिकापुर : में एक निजी स्कूल से जुड़ा मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। सोशल मीडिया और विभिन्न समाचार माध्यमों में यह खबर सामने आई कि एक छोटे बच्चे को भाषा के आधार पर स्कूल में प्रवेश देने से रोक दिया गया। मामले को गंभीर मानते हुए कलेक्टर अजीत वसंत ने तुरंत जांच के निर्देश जारी किए।

जांच में खुलासा: हिंदी न बोल पाने के कारण बच्चे को स्कूल ने किया बाहर

जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा कराई गई विस्तृत जांच में यह तथ्य सामने आया कि स्वरंग किड्स एकेडमी, चोपड़ापारा अंबिकापुर ने 4 वर्ष के एक बच्चे को इस आधार पर प्रवेश देने से इनकार किया कि वह हिंदी में बातचीत नहीं कर पाता और केवल सरगुजिहा भाषा बोलता है।

रिपोर्ट के अनुसार स्कूल प्रबंधन ने बच्चे के पिता से यह भी कहा कि यहां बड़े घरों के बच्चे पढ़ते हैं और शिक्षक बच्चे की भाषा नहीं समझ पाएंगे, इसलिए प्रवेश संभव नहीं है।

शिक्षा के मूल सिद्धांतों पर सवाल, नीति के प्रावधानों का खुला उल्लंघन

जांच में यह स्पष्ट हुआ कि यह पूरा मामला राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। किसी भी छात्र के साथ भाषा के आधार पर भेदभाव को पूरी तरह अनुचित और अस्वीकार्य माना गया है। यह व्यवहार शिक्षा के समान अधिकार की भावना को भी कमजोर करता है।

बिना मान्यता संचालन का भी खुलासा, स्कूल प्रबंधन ने स्वीकार की गलती

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि संस्था बिना वैध मान्यता के संचालित हो रही थी। स्पष्टीकरण में स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों ने अपनी गलती स्वीकार की। इससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई।

जांच समिति ने की पुष्टि, नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई तय

वरिष्ठ प्राचार्य रूमी घोष की अध्यक्षता में गठित जांच दल ने भी घटना की पुष्टि की। साथ ही यह तथ्य सामने आया कि विद्यालय बिना मान्यता के चल रहा था, जो नियमों का गंभीर उल्लंघन है।

शिक्षा के अधिकार कानून के तहत कड़ा कदम, 1 लाख रुपये का जुर्माना और संचालन पर रोक

निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 18(5) के तहत जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूल पर 1 लाख रुपये का आर्थिक दंड लगाया है। इसके साथ ही संस्था का संचालन अगले आदेश तक तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है।

बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की पहल, अन्य स्कूलों में एडमिशन की व्यवस्था के निर्देश

जिला शिक्षा अधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि जुर्माने की राशि सरकारी खजाने में जमा कराई जाए। साथ ही विकासखंड शिक्षा अधिकारी को यह जिम्मेदारी दी गई है कि प्रभावित बच्चों के अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें अन्य मान्यता प्राप्त स्कूलों में प्रवेश दिलाया जाए।

सख्त संदेश: शिक्षा में भेदभाव नहीं होगा बर्दाश्त

यह कार्रवाई शिक्षा संस्थानों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि किसी भी स्तर पर भाषा, वर्ग या पृष्ठभूमि के आधार पर भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने संकेत दिया है कि भविष्य में भी ऐसे मामलों पर कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *