बढ़ते कदम संजीवनी वृद्धाश्रम के नए भवन हेतु भूमि पूजन माता स्वरूप कन्याओं के शुभ हाथों से संपन्न हुवा

रायपुर छ.ग.बढ़ते कदम संजीवनी वृद्धाश्रम के नए भवन हेतु भूमि पूजन माता स्वरूप कन्याओं के शुभ हाथों से संपन्न हुवा कोटा रोड, गुढियारी स्थित संजीवनी वृद्धाश्रम में जँहा 30 बुजुर्गों के रहने की व्यवस्था है 18 वर्षों में 72 बुजुर्गों की घर वापसी व 36 बुजुर्गों की मृत्यु पर्यन्त सेवा के सफर को किराए के भवन में पूरा करने के पश्चात बढ़ते कदम संजीवनी वृद्धाश्रम के बुजुर्गों के नए आशियाने का भूमि पूजन माता स्वरूप कन्याओं के शुभ हाथों से संपन्न हुवा. संजीवनी वृद्धाश्रम 9500 वर्गफिट के भूखंड में भूतल पर गार्डन, पर्किंग, सीढ़ी, लिफ्ट प्रथम तल पर रसोई घर, भोजन कक्ष, महिला बुजुर्गों का रहवास द्वितीय तल पर मल्टिपरपस हॉल के साथ पुरुष बुजुर्गों का रहवास तृतीय तल निर्धन वर्ग हेतु छात्रावास प्रभारियों ने बताया कि वृद्धाश्रम में रहने वाले समस्त वरिष्ठ नागरिकों का मेडिकल परिक्षण, विषेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह नियमित रूप से ली जाती है। उनके स्वास्थ्य को देखते हुए खान-पान, कपड़ो की साफ-सफाई, साप्ताहिक चादर व तकिया कवर बदलने के साथ ही साथ साफ व स्वच्छ वातावरण निर्मित करने का प्रयास किया जाता हैं।संस्था बढ़ते कदम संजीवनी वृद्धाश्रम के प्रभारी सुनील छतवानी, सुनील पेशवानी एवम बसंत रोहरा जी ने बताया कि*वृद्धाश्रम का उद्देश्य* एक प्राचीन कहावत है कि कलयुग में एक ऐसा समय आएगा जब एक कुएं के पानी से चार कुओं को भरा जा सकेगा, लेकिन उन्ही चार कुओं के पानी से उस एक कुएं को नहीं भरा जा सकेगा। अर्थात एक मां बाप चार बच्चों का पेट भर लेगें लेकिन चार बच्चे मिलकर अपने मां-बाप का पेट नहीं भर पाएंगे।

आजकल अवकाश ग्रहण के बाद ‘‘अकेलापन’’ कड़वी सच्चाई है। जीवन के कठिन संघर्ष के दौरान कार्य करने की अवधि 25 से 60 वर्ष तक होती है। वरिष्ठ नागरिक अपने जीवन में अकेलापन महसूस करते हैं, क्योंकि बच्चे भी अपने पालकों की तरह उसी दिनचर्या में व्यस्त हो जाते हैं। प्राचीन समय में, जब संयुक्त परिवार व बड़े परिवारों की परम्परा थी, उस समय वरिष्ठजन सम्माननीय हुआ करते थे। आज के वैज्ञानिक युग में एकाकी परिवार एक वास्तविकता हैं। कई बार कुछ समय तक बुजुर्गों के परिवार से दूर वृद्धाश्रम में रहने से परिवार को बुजुर्गों की कमी का अहसास होता है। साथ ही बुजुर्ग भी परिवार से तालमेल बैठाने में मानसिक रूप से तैयार हो जाता है। इस प्रकार कांउसलिंग के माध्यम से थोड़े प्रयासों से ही 18 वर्षों में 72 बुजुर्गों की घर वापसी हुई है। इस प्रकार संयुक्त समूह में रहने से बुजुर्गों की कई समस्याएं हल हो सकती हैं। उक्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए ही बढ़ते कदम ने आनन्द आश्रम की स्थापना की है।*आनंद आश्रम की भविष्य की योजनाएं*

नए संजीवनी वृद्धाश्रम 9500 वर्गफिट के भूखंड में भूतल पर गार्डन, पर्किंग, सीढ़ी, लिफ्ट प्रथम तल पर रसोई घर, भोजन कक्ष, महिला बुजुर्गों का रहवास द्वितीय तल पर मल्टिपरपस हॉल के साथ पुरुष बुजुर्गों का रहवास तृतीय तल निर्धन वर्ग हेतु छात्रावास. *वृद्धाश्रम में प्रवेश हेतु नियमावली* ‘‘संजीवनी’’, बढ़ते कदम वृद्धाश्रम में प्रवेश के इच्छुक व्यक्ति को प्रवेश हेतु निम्नलिखित पात्रताओं एवं नियम शर्तों को पूरा करना आवश्यक होगा। प्रवेश लेने वालो की आयुसीमा न्यूनतम 60 वर्ष होनी चाहिए। वह किसी प्रकार के व्यसन का आदि न हो। एवं उसका कभी भी कोई अपराधिक या पुलिस रिकार्ड न रहा हो। किसी गंभीर या संक्रामक रोग से ग्रसित न हो। प्रवेषार्थी में किसी प्रकार की कोई शारीरिक या मानसिक विकलांगता न हो, अर्थात दैनिक कार्यों को करने में सक्षम हो। वृद्धाश्रम में प्रवेश हेतु परिवार के अन्य सदस्यों की लिखित अनुमति आवश्यक होगी। किसी भी प्रकार के दुराचरण, असंसदीय भाषा, असभ्य व्यवहार, दूसरों को मानसिक या शारीरिक कष्ट देने की अवस्था में या नियम शर्तों और आचार संहिता के परिपालन में दोषी पाए जाने पर मैनेजमेन्ट कमेटी को उसकी सदस्यता तुरन्त निरस्त करने का अधिकार होगा। *बढ़ते कदम वृद्धाश्रम की विषेषताएं*1. वरिष्ठ नागरिकों को समर्पित।2. शांतिप्रिय वातावरण में प्रकृति के साथ रहवास3. बरामदे व आंगन की सुविधा। 4. सुरक्षा व्यवस्था।5. 24 घण्टे पानी की सुविधा।6. गरम पानी की सुविधा।7. प्रतिबद्ध योजना सेवा भाव के साथ आध्यात्म के लिए।8. दो बहुउद्देषीय हाल- ध्यान योग केन्द्र, सम्मेलन कक्ष, अध्ययन कक्ष, मनोरंजन कक्ष आदि के रूप में उपयोग।9. मंदिर की स्थापना10. नियमित स्वास्थ्य परिक्षण

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