रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने माल एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक 2025 पारित कर व्यापार और वाणिज्य जगत को नई गति देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। इस विधेयक का उद्देश्य व्यापारियों को कानूनी राहत देना, कारोबारी प्रक्रियाओं को सरल बनाना और जीएसटी मामलों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करना है।
इनपुट टैक्स क्रेडिट से संबंधित प्रावधानों को अधिक स्पष्ट किया गया है। अब रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म के तहत आईजीएसटी में प्राप्त क्रेडिट को कंपनियां अपनी शाखाओं में वितरित कर सकेंगी। साथ ही अपील मामलों में टैक्स डिमांड न होने पर डिपॉजिट राशि 25% से घटाकर 10% कर दी गई है।
वाउचर पर जीएसटी अब रिडीमिंग के समय लगेगा, जिससे पहले की अस्पष्टता दूर होगी। वहीं, तंबाकू जैसे उत्पादों के लिए ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम लागू किया गया है, जिसमें यूनिट पैक पर क्यूआर कोड से उत्पाद की पूरी जानकारी उपलब्ध रहेगी।
स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (SEZ) के वेयरहाउस में रखे माल के निर्यात से पहले खरीद-बिक्री पर अब GST नहीं लगेगा। इससे सेज में निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
राज्य में ई-वे बिल की सीमा ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1,00,000 कर दी गई है, जिससे 26% छोटे व्यापारियों को कागजी कार्यवाही से राहत मिली है।
सरकार ने नई व्यवस्था के तहत अब सिर्फ 2 दिन में GST पंजीकरण की सुविधा दी है। पहले सिर्फ 15 जिलों में GST कार्यालय थे, अब यह संख्या बढ़ाकर 33 जिलों में कर दी गई है।
वर्ष 2024-25 में छत्तीसगढ़ को ₹16,299 करोड़ GST राजस्व प्राप्त हुआ, जो राज्य के कुल कर राजस्व का 38% है। इस वर्ष 18% की वृद्धि के साथ राज्य देश में पहले स्थान पर रहा।