महंत लक्ष्मीनारायण दास महाविद्यालय, रायपुर के वाणिज्य शोध केंद्र द्वारा ऑनलाईन व्याख्यान का आयोजन किया गया

 माँ के दूधपान से  बच्चों में आक्रमकता में कमी प्रो उषा

रायपुर। वाणिज्य शोध केंद्र, महंत लक्ष्मीनारायण दास महाविद्यालय, रायपुर द्वारा दिनांक 10 जुलाई 2025 को प्रातः 10:00 बजे गूगल मीट प्लेटफार्म पर एक शैक्षणिक व्याख्यान का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. देवाशीष मुखर्जी ने की। इस अवसर पर प्रमुख वक्ता प्रोफेसर (डॉ.) उषा किरण अग्रवाल, प्राचार्य, चंदूलाल चंद्राकार कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, धमधा (छत्तीसगढ़) रहीं। उन्होंने “अनुसंधान समस्या का निर्माण एवं अनुसंधान डिज़ाइन” विषय पर विस्तार से व्याख्यान दिया।

डॉ. अग्रवाल ने शोध प्राविधि, अनुसंधान के महत्व, उसके उद्देश्य, तथा वैज्ञानिक अनुसंधान के हॉलमार्क्स की चर्चा करते हुए प्रतिभागियों को महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान कीं। उन्होंने “हाइपोथेसिस” की परिभाषा, उसकी आवश्यकता एवं विभिन्न प्रकारों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया की अनुसंधान डिज़ाइन किसी भी शोध कार्य की प्रारंभिक और अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है। अनुसंधान समस्या वह स्थिति होती है जो जिज्ञासा उत्पन्न करती है और समाधान की अपेक्षा करती है। एक उपयुक्त अनुसंधान समस्या का चयन करते समय शोधकर्ता को अपने विषय में रुचि, सामाजिक उपयोगिता, पूर्ववर्ती शोधों की सीमाएँ तथा उपलब्ध संसाधनों का ध्यान रखना चाहिए। साथ ही, शोध में परिकल्पना का विशेष स्थान होता है, जो एक संभावित उत्तर या समाधान प्रस्तुत करती है। परिकल्पनाएँ शून्य या वैकल्पिक रूप में हो सकती हैं और इनका परीक्षण शोध की दिशा को प्रभावित करता है। एक अच्छी परिकल्पना स्पष्ट, संक्षिप्त एवं परीक्षण योग्य होती है। अनुसंधान डिज़ाइन के माध्यम से शोधकर्ता न केवल अनुसंधान की गुणवत्ता सुनिश्चित करता है, बल्कि वैज्ञानिक तथ्यों की विश्वसनीयता एवं सटीकता को भी प्रमाणित करता है। इस प्रकार अनुसंधान समस्या का उचित निर्माण एवं सुदृढ़ डिज़ाइन, किसी भी सफल शोध परियोजना की नींव होते हैं।  उन्होंने रिसर्च के कुछ रोचक उदाहरण प्रस्तुत किये एवम कहा कि माँ के दूधपान से बच्चों में आक्रमकता में कमी आती है बनिस्बत डब्बे वाली दूध के, कार्यक्रम में प्रोफेसर डॉ. शांतनु पॉल ने प्रमुख वक्ता का परिचय प्रस्तुत किया तथा डॉ. श्वेता महाकालकर द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया । इस ज्ञानवर्धक व्याख्यान में 50 से अधिक प्राध्यापकों एवं शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता दर्ज कराई।

कार्यक्रम का सफल संचालन एवं आयोजन वाणिज्य शोध केंद्र की सराहनीय पहल रही, जिसने शोध के क्षेत्र में नई दृष्टि प्रदान की।

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